Wednesday, 29 July 2020

जो मन में बनता है वही जीवन में बनता है।

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मनुष्य के जीवन मे जो परिस्थियाँ जैसी हो यदि उसी रूप में लगातार देखने में आती है तो इंसान की रातों की नींद गायब हो जाती है। इसलिए कुछ ज्यादा ही वास्तविकतावादी लोग अधिकतर निराशा में जीवन जीने लगते हैं। अतः यदि खुद को स्थिति की वास्तविकता का बार-बार अनुभव कराते रहोगे तो वास्तविकता जैसी है वैसी ही रहेगी। वास्तविकता को यदि बदलना है तो कुछ कल्पनाशील बनो

     इसलिए कहा गया है कि " मानसिक दुनिया में जो  छोटे रूप से सृजित होता है,  वही भौतिक दुनिया में विशाल रूप में सृजित होता है।"👍












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